भारत और ओमान के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) अब आखिरकार 1 जून 2026 से लागू हो गया है। यह समझौता उस समय प्रभावी हुआ है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक चुनौतियां बढ़ रही हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में, यह समझौता भारत के लिए सिर्फ व्यापारिक अवसर नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिसंबर 2025 में मस्कट में हस्ताक्षरित इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, सेवाओं और पेशेवर सहयोग को नई गति देना है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 11.18 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जो पिछले वर्ष की तुलना में एक उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि CEPA लागू होने से भारतीय निर्यातकों को ओमान के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध और भी मजबूत होंगे।
आखिर क्या है CEPA समझौता?
Comprehensive Economic Partnership Agreement, दो देशों के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौता है। इसका मकसद सिर्फ सामानों के आयात-निर्यात को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि यह निवेश, सेवाओं, व्यापारिक सहयोग और पेशेवर अवसरों को भी बढ़ाने पर जोर देता है। आसान शब्दों में कहें तो, इस तरह के समझौते में दोनों देश कई उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क को कम कर देते हैं या पूरी तरह से खत्म कर देते हैं। इससे व्यापार करना आसान और सस्ता हो जाता है, जिसका फायदा दोनों देशों के व्यापारियों और उपभोक्ताओं को मिलता है। भारत और ओमान ने दिसंबर 2025 में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, और अब यह 1 जून 2026 से पूरी तरह से लागू हो चुका है।
भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत
इस समझौते की सबसे बड़ी बात यह है कि ओमान ने भारत से आने वाले ज्यादातर उत्पादों को ड्यूटी-फ्री एक्सेस देने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि भारतीय कंपनियों को अपने उत्पाद ओमान भेजने में पहले से कम खर्च करना पड़ेगा। पहले कई उत्पादों पर लगभग 5 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता था। इस शुल्क के हटने से भारतीय उत्पादों की कीमतें कम होंगी और वे ओमान के बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। इससे भारतीय निर्यातकों को सीधा फायदा होने की उम्मीद है। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से छोटे और मध्यम उद्योगों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने का मौका मिलेगा। कई ऐसे व्यवसाय जो अब तक निर्यात की दिशा में कदम नहीं बढ़ा पाए थे, उनके लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
किन क्षेत्रों को मिलेगा सबसे अधिक फायदा?
भारत-ओमान CEPA समझौते का लाभ कई प्रमुख क्षेत्रों को मिलने वाला है। इनमें कुछ ऐसे सेक्टर भी शामिल हैं जो देश में लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते हैं।
टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग
भारतीय कपड़ा उद्योग लंबे समय से देश की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ रहा है। खाड़ी देशों में भारतीय कपड़ों और रेडीमेड गारमेंट्स की अच्छी मांग रहती है। अब ड्यूटी में राहत मिलने के बाद भारतीय उत्पाद और अधिक आकर्षक कीमतों पर उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे निर्यात बढ़ने की संभावना है।
फार्मास्युटिकल सेक्टर
भारत को दुनिया की फार्मेसी कहा जाता है। भारतीय दवा कंपनियां पहले से ही कई देशों में अपनी मजबूत उपस्थिति रखती हैं। ओमान में शुल्क कम होने से भारतीय जेनेरिक दवाओं की पहुंच और बढ़ सकती है। इससे दवा उद्योग को बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद है।
इंजीनियरिंग और ऑटो कंपोनेंट्स
भारत से निर्यात होने वाली मशीनरी, औद्योगिक उपकरण और ऑटो पार्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। CEPA लागू होने के बाद इस क्षेत्र की कंपनियों को ओमान में नए व्यापारिक अवसर मिल सकते हैं।
रत्न और आभूषण उद्योग
भारतीय ज्वेलरी उद्योग अपनी गुणवत्ता और कारीगरी के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। ओमान के बाजार में टैक्स राहत मिलने से भारतीय आभूषण उद्योग को भी फायदा मिलने की संभावना है।
कृषि और समुद्री उत्पाद
बासमती चावल, मसाले, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और समुद्री उत्पाद भारत के प्रमुख निर्यात उत्पादों में शामिल हैं। शुल्क में राहत मिलने के बाद इन उत्पादों की मांग और निर्यात दोनों बढ़ सकते हैं।
व्यापार से आगे की सोच
इस समझौते की अहमियत केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। वर्तमान समय में पश्चिम एशिया में कई तरह की भू-राजनीतिक चुनौतियां देखने को मिल रही हैं। ऐसे माहौल में ओमान भारत के लिए एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार बनकर उभरा है।
ओमान की भौगोलिक स्थिति भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। वहां के प्रमुख बंदरगाह सलालाह और दुकम अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से बेहद रणनीतिक माने जाते हैं। इन बंदरगाहों के माध्यम से भारत खाड़ी देशों, अफ्रीका और यूरोप तक अपने व्यापारिक नेटवर्क को और मजबूत बना सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भविष्य में भारत की सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने में भी मदद करेगा।
किसानों और घरेलू उद्योगों का भी रखा गया ध्यान
किसी भी व्यापारिक समझौते में सबसे बड़ी चिंता घरेलू उद्योगों और किसानों की सुरक्षा को लेकर होती है। भारत ने इस समझौते में इस पहलू का विशेष ध्यान रखा है।
देश के कई संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते के दायरे से बाहर रखा गया है। इनमें डेयरी उत्पाद, खाद्य तेल, ताजे फल और सब्जियां, चाय, कॉफी तथा कुछ अन्य कृषि उत्पाद शामिल हैं।
इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी उत्पादों की वजह से भारतीय किसानों और छोटे कारोबारियों को नुकसान न उठाना पड़े।
भारतीय पेशेवरों के लिए भी अवसर
इस समझौते का लाभ केवल उद्योग और व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। भारतीय पेशेवरों के लिए भी इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
ओमान में इंजीनियरों, डॉक्टरों, आईटी विशेषज्ञों, वित्तीय सलाहकारों और अन्य कुशल पेशेवरों की मांग लगातार बनी रहती है। CEPA लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच पेशेवर सेवाओं का आदान-प्रदान आसान हो सकता है।
इससे भारतीय युवाओं के लिए खाड़ी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर खुल सकते हैं। विशेष रूप से आईटी और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों को इसका फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है।
आने वाले वर्षों में क्या बदलेगा?
भारत और ओमान के बीच व्यापार पहले से ही काफी मजबूत है। लेकिन CEPA के लागू होने के बाद, दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियों में और भी तेजी आने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारतीय निर्यात को बढ़ावा देने, विदेशी निवेश को आकर्षित करने और वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इसके अलावा, यह समझौता भारत के उस बड़े लक्ष्य का भी हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत देश आने वाले वर्षों में अपने निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की योजना बना रहा है।
निष्कर्ष
भारत-ओमान CEPA समझौता दोनों देशों के संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। इससे भारतीय उद्योगों को बड़ा बाजार मिलेगा, निर्यातकों को नई संभावनाएं मिलेंगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
व्यापार, निवेश, रणनीतिक सहयोग और पेशेवर अवसरों के लिहाज से यह समझौता आने वाले वर्षों में भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यही वजह है कि 1 जून 2026 को भारत-ओमान आर्थिक साझेदारी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन के रूप में याद किया जाएगा।
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