मिडिल-ईस्ट में कई हफ्तों से चल रहा तनाव अब थोड़ा कम होता नजर आ रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच करीब 40 दिनों तक चले संघर्ष के बाद फिलहाल दो हफ्तों के लिए युद्धविराम लागू किया गया है, जिससे लोगों को कुछ राहत मिली है।
हालांकि, सीजफायर के बावजूद स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं कही जा सकती। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है, क्योंकि यह क्षेत्र तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है और इसका असर सीधे वैश्विक बाजार पर पड़ता है।
भारत ने भी इस हालात को गंभीरता से लेते हुए अपनी तैयारियां मजबूत रखी हैं। भारतीय नौसेना होर्मुज क्षेत्र में मौजूद अपने जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार एस्कॉर्ट ऑपरेशन चला रही है। इसके अलावा गुरुग्राम स्थित IFC-IOR सेंटर के जरिए पूरे इलाके पर कड़ी नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी खतरे का समय रहते सामना किया जा सके।
इस बीच, अमेरिका ने फिलहाल अपनी सैन्य कार्रवाई को रोकने का फैसला लिया है, ताकि बातचीत के जरिए समाधान निकलने का रास्ता खुल सके। वहीं, ईरान ने भी कुछ शर्तों के साथ इस युद्धविराम को स्वीकार किया है और आगे बातचीत के संकेत दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ अस्थायी राहत है और स्थायी शांति के लिए अभी और प्रयास करने होंगे। आने वाले समय में इस मुद्दे पर बड़े स्तर पर फैसले लिए जा सकते हैं।
यह पूरा घटनाक्रम भारत सहित कई देशों के लिए काफी महत्वपूर्ण बना हुआ है, खासकर ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से।

