देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE की तरफ से दो बड़ी अपडेट सामने आई हैं। नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत बोर्ड परीक्षाओं में किए जा रहे बदलाव अब पूरी तरह लागू होते दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ कक्षा 10वीं के छात्रों के लिए दूसरी बोर्ड परीक्षा (Second Board Exam) की शुरुआत हो चुकी है, वहीं दूसरी ओर 12वीं के रिजल्ट और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर चल रहे विवाद पर शिक्षा मंत्रालय ने बड़ा बयान जारी किया है।
इन दोनों अपडेट्स को छात्रों के भविष्य और भारतीय शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। खासतौर पर “एक परीक्षा से भविष्य तय” होने वाली पुरानी व्यवस्था को बदलने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कक्षा 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षाएं शुरू
CBSE के परीक्षा नियंत्रक डॉ. संयम भारद्वाज ने जानकारी देते हुए बताया कि कक्षा 10वीं की सेकंड बोर्ड परीक्षाएं 15 मई 2026 से शुरू हो चुकी हैं और ये परीक्षाएं 21 मई 2026 तक आयोजित की जाएंगी।
यह परीक्षा उन छात्रों के लिए आयोजित की गई है जो अपने पहले बोर्ड परीक्षा के अंकों से संतुष्ट नहीं थे और अपने रिजल्ट में सुधार करना चाहते हैं। नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों को “Improvement Opportunity” देने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है।
छात्रों को क्या फायदा मिलेगा?
- पहली परीक्षा में कम अंक आने पर दूसरा मौका मिलेगा
- मानसिक दबाव और परीक्षा का डर कम होगा
- छात्र अपने प्रदर्शन में सुधार कर सकेंगे
- करियर और कॉलेज एडमिशन के लिए बेहतर प्रतिशत हासिल करने का अवसर मिलेगा
- “एक गलती से पूरा साल खराब” होने की समस्या कम होगी
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाएगी और उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगी।
NEP 2020 के तहत बदल रही है परीक्षा व्यवस्था
नई शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य छात्रों पर परीक्षा का दबाव कम करना और सीखने की प्रक्रिया को अधिक लचीला बनाना है। इसी कारण CBSE अब बोर्ड परीक्षाओं को अधिक “Student Friendly” बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
भविष्य में संभावना जताई जा रही है कि:
- बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित हो सकती हैं
- छात्रों को Best Score चुनने का विकल्प मिल सकता है
- रटने की बजाय Concept Based Questions बढ़ सकते हैं
- डिजिटल मूल्यांकन और तकनीकी सिस्टम का उपयोग और बढ़ेगा
यह बदलाव भारतीय शिक्षा प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर के करीब ले जाने की कोशिश माना जा रहा है।
Class 12 Result और OSM Checking पर बड़ा बयान
हाल ही में सोशल मीडिया पर कई छात्रों और अभिभावकों ने CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली पर सवाल उठाए थे। कुछ लोगों का दावा था कि डिजिटल मूल्यांकन की वजह से छात्रों के अंक प्रभावित हुए हैं।
इन विवादों के बीच शिक्षा मंत्रालय और CBSE बोर्ड ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।
क्या कहा शिक्षा मंत्रालय ने?
मंत्रालय के अनुसार:
- OSM सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी है
- डिजिटल मूल्यांकन से मानवीय गलतियों की संभावना कम होती है
- टोटलिंग और मार्क एंट्री की समस्याएं लगभग खत्म हो जाती हैं
- छात्रों के अंकों पर किसी प्रकार का गलत या नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है
CBSE ने यह भी कहा कि आधुनिक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित की गई है और इससे रिजल्ट प्रक्रिया अधिक तेज और सटीक बनती है।
क्या होता है OSM (On-Screen Marking) सिस्टम?
OSM यानी On-Screen Marking एक डिजिटल कॉपी चेकिंग सिस्टम है जिसमें छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके ऑनलाइन मूल्यांकन किया जाता है।
OSM सिस्टम के फायदे
✅ कॉपियों की जांच अधिक पारदर्शी होती है
✅ नंबर जोड़ने की गलती नहीं होती
✅ मूल्यांकन प्रक्रिया तेज होती है
✅ मॉडरेशन और गुणवत्ता नियंत्रण बेहतर होता है
✅ हर उत्तर का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है
CBSE पिछले कुछ वर्षों से इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक भरोसेमंद बनाया जा सके।
छात्रों के लिए जरूरी सूचना: Verification और Rechecking का मौका
CBSE ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन छात्रों को अपने अंकों को लेकर संदेह है, वे Answer Sheet Verification, Photocopy और Rechecking के लिए आवेदन कर सकते हैं।
छात्र क्या कर सकते हैं?
- मार्क्स Verification के लिए आवेदन
- Answer Sheet की Photocopy प्राप्त करना
- Specific Questions की Rechecking करवाना
इसके लिए बोर्ड जल्द आधिकारिक पोर्टल पर निर्धारित तारीख और प्रक्रिया जारी करेगा। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही जानकारी प्राप्त करें और सोशल मीडिया अफवाहों पर भरोसा न करें।
छात्रों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया
कई छात्रों और शिक्षा विशेषज्ञों ने साल में दो बार परीक्षा आयोजित करने के फैसले का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे छात्रों पर मानसिक दबाव कम होगा और उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार बेहतर प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार परीक्षा होने से तैयारी का दबाव लगातार बना रह सकता है। इसलिए बोर्ड को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और परीक्षा कैलेंडर के बीच संतुलन बनाना होगा।
निष्कर्ष
CBSE द्वारा शुरू की गई दूसरी बोर्ड परीक्षा और डिजिटल OSM मूल्यांकन प्रणाली भारतीय शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत हैं। नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों को अधिक अवसर, कम तनाव और बेहतर मूल्यांकन प्रणाली देने की कोशिश की जा रही है।
कक्षा 10वीं के छात्रों के लिए दूसरी परीक्षा एक नया अवसर बनकर सामने आई है, जबकि 12वीं के छात्रों के लिए शिक्षा मंत्रालय का बयान OSM विवाद को शांत करने वाला साबित हो सकता है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले वर्षों में CBSE और शिक्षा मंत्रालय परीक्षा प्रणाली में और कौन-कौन से बड़े बदलाव लागू करते हैं।
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