देश में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में नारी शक्ति वंदन विधेयक 2026 पेश किया है।
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। इसके तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की योजना बनाई गई है।
इसके लिए परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया को भी जोड़ा गया है। इससे लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है और 2029 के चुनाव से पहले इसे लागू करने की तैयारी है।
अगर मौजूदा स्थिति की बात करें तो 543 सदस्यीय लोकसभा में केवल 75 महिला सांसद हैं। यह कुल संख्या का लगभग 14 प्रतिशत ही है।
पार्टी के अनुसार देखें तो भाजपा के पास 31 महिला सांसद हैं। इसके बाद कांग्रेस के पास 13 और तृणमूल कांग्रेस के पास 11 महिला सांसद मौजूद हैं।
हालांकि, प्रतिशत के हिसाब से तृणमूल कांग्रेस महिलाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने में आगे नजर आती है। वहीं, कुछ अन्य दल इस मामले में पीछे हैं।
चुनावी आंकड़ों के अनुसार, 2024 लोकसभा चुनाव में कुल उम्मीदवारों में से केवल लगभग 10 प्रतिशत महिलाएं थीं। कई सीटों पर तो एक भी महिला उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरी।
विधानसभाओं की स्थिति भी ज्यादा बेहतर नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में महिला उम्मीदवारों की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत के आसपास ही रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह विधेयक लागू होता है, तो आने वाले समय में महिलाओं की भागीदारी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
यह मुद्दा न केवल राजनीति बल्कि समाज में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

